(१) #गायत्री_वेद_मातरम् । -महाभारत
गायत्री चारों वेदों की माता है । वेदों का समस्त ज्ञान - विज्ञान गायत्री से सन्निहित है ।
(२) #गायत्रीच्छन्दसामहम् । -गीता
वेद मंत्रों में गायत्री साक्षात् ब्रह्म हैं । ब्रह्म का साक्षात् करने के इच्छुक गायत्री - उपासना करें ।
(३) #न_गायत्री_समजाप्यं । -वशिष्ठ
गायत्री के समान और कोई जप श्रेष्ठ नहीं । सकाम - निष्काम उद्देश्यों के लिए सर्व श्रेष्ठ मंत्र गायत्री ही है
(४) #गायत्री_पापनाशिनी । -विश्वामित्र
गायत्री - उपासना से पाप नष्ट होते हैं । आत्मा को निष्पाप बनाने के लिए गायत्री का आश्रय लेना चाहिए ।
(५) #गायत्री_सर्व_काम_धुक् । -याज्ञवल्क्य
गायत्री सब कामनाओं को पूर्ण करने वाली है । गायत्री उपासक की कोई कामना अपूर्ण नहीं रहती...… ।
#मंत्र :
ॐ भूर् भुवः स्वः।
तत् सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
गायत्री मंत्र का नियमित रुप से सात बार जप करने से व्यक्ति के आसपास नकारात्मक शक्तियाँ बिलकुल नहीं आती।
जप से कई प्रकार के लाभ होते हैं, व्यक्ति का तेज बढ़ता है और मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है। बौद्धिक क्षमता और मेधाशक्ति यानी स्मरणशक्ति बढ़ती है।
गायत्री मंत्र में चौबीस अक्षर होते हैं, यह 24 अक्षर चौबीस शक्तियों-सिद्धियों के प्रतीक हैं।
इसी कारण ऋषियों ने गायत्री मंत्र को सभी प्रकार की मनोकामना को पूर्ण करने वाला बताया है।

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