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जैन की कचौरी के िदवानेहै लोग, 40 साल से बना आ है जायका टोकं . टोकं आए ओर कचौरी नही खाए येनही हो सकता। ाद ऐसा िक बेहो या बड़े, पुष हो या मिहला सीधेचलेआतेहैकचौरी भार की ओर। इतना ही नही िजला कलेट हो या िफर कोई भी सरकारी बैठक ोंना हो उसमकचैारी नाेमपहली पसंद होती है। वजीरपुरा िनवासी रामेर चौधरी का कहना हैिक कचौरी माद व पोदीनेकी चटनी का जायका अलग ही हैजो ाहक को अपनी तरफ खीचं लाता है। एक कचौरी खानेके बाद बार-बार दुबारा कचौरी खानेका मन करता है। जी हां हम बात कर रहेहैकलेट के सामनेटोकं मशु व ािद कचौरी के िलए जानेजानेवालेजैन कचोरी भार की। यहां के संचालक धा लाल जैन नेबताया िक उनके यहां िपछले 40 सालोंसेकचौरी व नमकीन बनानेका कायचल रहा है। जैन नेबताया िक इन 40 सालोंमकई उतार-चढूाव आए लेिकन उोनआज तक ालटी सेकोई समझोता नही िकया। ाहकोंके ा को ान मरखतेए को शु गुणवपूणमाल उप करवाना ही उनका मकसद रहा है। जैन नेबताया िक 40 साल पहलेजब दुकान पर कचौरी का काम शु िकया था तब एक कचोरी 60 पैसे की थी। उस समय एक िदन मकरीब 500 से 600 कचौरी ितिदन खपत हो जाती थी। धीरे-धीरेमहंगाई बढऩेके साथ-साथ कचौरी की कीमत मबढ़ोतरी होती गई...
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 🍁 ऋषिकेश यात्रा करें, तो कमल रामवानी सारांश की यात्रा विवरण बड़े काम की है। 🍁 ऋषिकेश में गीता भवन सबसे सस्ती रहने और खाने की जगह है।.... ऑनलाइन सुविधा नहीं है।.... परंतु 1000 कमरे होने के कारण रूम आराम से मिल जाते हैं। .... और रूम निःशुल्क हैं। .... 1950 में सेठ गोयनका जी और ....कर्मठ भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के कारण बना ....गीता प्रेस गोरखपुर और ....गीता भवन सनातन हिन्दू धर्म के लिए समर्पित एक संस्थान है। 🍁 स्वाद और सादगी का संगम। .... गीता भवन की पूड़ी-सब्ज़ी -मिठाई की दुकान, ऋषिकेश लाजवाब है। ...भूलकर भी "चोटीवाला" में खाने न जाएं। ....ऊंची दुकान-फीकी पकवान और दाम ऐसा की लूट जाने का अहसास होगा। 🍁 गीता भवन में लगभग 1000 कमरे हैं .... जहाँ भक्त निःशुल्क रह सकते है।...  यहां रहने से पहले आपको कुछ सिक्युरिटी डिपाजिट जमा करवाना होता है ... जो आपके रूम छोड़ते वक़्त आपको रिफंड कर दिया जाता है।  🍁 इसी परिसर में आयुर्वेदिक विभाग, कपड़ों की दुकान, किताब की दुकान और लक्ष्मी-नारायण मन्दिर भी स्थित हैं।  🍁 शाकाहारी भोजन, मिठाई और अन्य रसोई के सामानों की यहाँ बड़े कम मूल्य...
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  #विजयादशमी इस दिन हम शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि)। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है। दशहरे का सांस्कृतिक पहलू भी है। भारत कृषि प्रधान देश है। जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है...
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  माँ के भोग के लिए : बेसन का हलवा बहुत ही आसानी से और जल्दी से बन जाता हैं ये स्वादिष्ट और दानेदार हलवा दूध को गरम करे,जब उबाल आ जाये तो इस मे शक़्कर,केसर की पत्तियां और इलाईची पाउडर डाल एक उबाल लें बंद कर दे। एक पैन में घी गरम कर बेसन डाल दे,लगातार हिलाते हुए बहुत गहरा या गोल्डन ब्राउन सेक ले। अब इस को लगातार चलाते हुए धीरे धीरे गरम दूध डालते रहे,गाँठ नही पड़नी चाहिए। जब तक घी नही छूट जाए तब तक हिलाते रहे। बादाम और पिस्ता को काट कर डाल दे,और हिलाते रहे। रेडी है हमारा दानेदार हलवा जल्दी से माता रानी को भोग अर्पण करें और आप भी स्वादिष्ट हलवे का प्रसाद ग्रहण कर आनंद ले।
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  #गायत्री_माहात्म्य (१) #गायत्री_वेद_मातरम् । -महाभारत गायत्री चारों वेदों की माता है । वेदों का समस्त ज्ञान - विज्ञान गायत्री से सन्निहित है । (२) #गायत्रीच्छन्दसामहम् । -गीता वेद मंत्रों में गायत्री साक्षात् ब्रह्म हैं । ब्रह्म का साक्षात् करने के इच्छुक गायत्री - उपासना करें । (३) #न_गायत्री_समजाप्यं । -वशिष्ठ गायत्री के समान और कोई जप श्रेष्ठ नहीं । सकाम - निष्काम उद्देश्यों के लिए सर्व श्रेष्ठ मंत्र गायत्री ही है (४) #गायत्री_पापनाशिनी । -विश्वामित्र गायत्री - उपासना से पाप नष्ट होते हैं । आत्मा को निष्पाप बनाने के लिए गायत्री का आश्रय लेना चाहिए । (५) #गायत्री_सर्व_काम_धुक् । -याज्ञवल्क्य गायत्री सब कामनाओं को पूर्ण करने वाली है । गायत्री उपासक की कोई कामना अपूर्ण नहीं रहती...… । #मंत्र : ॐ भूर् भुवः स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ हिन्दी में भावार्थ :- "उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।"...